Kaise samjhaun badi na samajh ho......Suraj (1966)

    फिल्म : सूरज (1966)


    संगीतकार : शंकर जयकिशन
    गीतकार : हसरत जयपुरी
    गायक : मोहम्मद रफ़ी , आशा भोसले

    गीत

    रफ़ी : कैसे समझाऊँ बड़ी नासमझ हो -2
    हमसे न जीतोगी तुम रहने दो ये बाज़ी
    मकैसे समझाऊँ ........

    आशा : कैसे समझाऊँ बड़े नासमझ हो -२
    आए-गए तुम जैसे सैकड़ों अनाड़ी
    कैसे समझाऊँ ..

    रफ़ी : हम दिल का साज़ बजाते हैं दुनिया के होश उड़ाते हैं
    हम सात सुरों के सागर हैं हर महफ़िल में लहराते हैं -2
    कैसे समझाऊँ ...

    आशा : तुम साज़ बजाना क्या जानो तुम रंग जमाना क्या जानो -२
    महफ़िल तो हमारे दम से है तुम होश उड़ाना क्या जानो -२
    कैसे समझाऊँ ...

    रफ़ी : मैं नाचूँ चाँद-सितारों पर शोलों पर शरारों पर
    हम ऐसी कला के दीवाने छा जाएँ नशीली बहारों पर
    कैसे समझाऊँ ...

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